नोटबंदी के कारण मर गया बेटा
अब नोटबंदी के कारण लोग मरने लगे हैं । एक बीमार बच्चे के पिता की जेब में 29 हजार रुपये थे, लेकिन सभी ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया नतीजतन बच्चे की जान चली गई, तो इस दर्दनाक मंजर को लफ्जों में बयां करना बहुत मुश्किल है।
जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में एक बाप अपने बीमार बेटे को कंधे पर लादे भटकता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन नोटबंदी की वजह से उसके पुराने नोट लेने को कोई तैयार नहीं हुआ। इस वजह से नौ साल के मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बच्चे के पिता मोहम्मद हारून अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए घर से 29000 रुपये लेकर निकले। लेकिन नजदीकी अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनके बच्चे मुनीर की जान चली गई।
कश्मीर के हारून शुक्रवार रात को नौ साल के बीमार मुनीर को अपने कंधे पर लादकर 30 किलोमीटर तक पैदल चल लेकिन अपने बच्चे की जान नही बचा सके। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद कश्मीर में मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है।
नायब तहसीलदार कुलदीप राज और गोरां पुलिस पोस्ट के इंचार्ज नानक चंद ने इस मामले में मोहम्मद हारून का सोमवार को बयान दर्ज किया था।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार रात को नौ साल के बीमार मुनीर को अपने कंधे पर लादकर हारून 30 किलोमीटर तक पैदल चले। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद कश्मीर में मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है।हारून का कहना है कि मृतक मुनीर दूसरी में पढ़ता था। इस बीच नायब तहसीलदार कुलदीप राज और गोरां पुलिस पोस्ट के इंचार्ज नानक चंद ने इस मामले में मोहम्मद हारून का सोमवार को बयान दर्ज किया था।
हारून रुपये बदलवाने के लिए 3 दिन तक घुम लिया लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण रुपये बदले नही जा सके। हारून ने बताया कि 18 नवंबर को जब मुनीर की ज्यादा ही हालात खराब हो गई तो हारून और उनकी पत्नी ने बिना देरी किए उसे अस्पताल ले जाने का फैसला किया। हारून अपनी पत्नी के साथ बेटे को कंधे पर लादकर अपने घर से तीन बजे चले। इसके बाद वे नौ किलोमीटर चलने के बाद रात आठ बजे के करीब सड़क तक पहुंचे।
हारूनी ने सडक पर एक वैन ड्राइवर से प्रार्थना की कि वे हमें मानसर पहुंचा दें, लेकिन उसने पुराने नोट लेने से मना कर दिया। हारून पैदल ही बच्चे को सुबह पांच बजे डॉक्टर के पास पहुंचे, तब तक मुनीर ने दम तोड़ दिया था।
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अब नोटबंदी के कारण लोग मरने लगे हैं । एक बीमार बच्चे के पिता की जेब में 29 हजार रुपये थे, लेकिन सभी ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया नतीजतन बच्चे की जान चली गई, तो इस दर्दनाक मंजर को लफ्जों में बयां करना बहुत मुश्किल है।
जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में एक बाप अपने बीमार बेटे को कंधे पर लादे भटकता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन नोटबंदी की वजह से उसके पुराने नोट लेने को कोई तैयार नहीं हुआ। इस वजह से नौ साल के मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बच्चे के पिता मोहम्मद हारून अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए घर से 29000 रुपये लेकर निकले। लेकिन नजदीकी अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनके बच्चे मुनीर की जान चली गई।
कश्मीर के हारून शुक्रवार रात को नौ साल के बीमार मुनीर को अपने कंधे पर लादकर 30 किलोमीटर तक पैदल चल लेकिन अपने बच्चे की जान नही बचा सके। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद कश्मीर में मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है।
नायब तहसीलदार कुलदीप राज और गोरां पुलिस पोस्ट के इंचार्ज नानक चंद ने इस मामले में मोहम्मद हारून का सोमवार को बयान दर्ज किया था।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार रात को नौ साल के बीमार मुनीर को अपने कंधे पर लादकर हारून 30 किलोमीटर तक पैदल चले। 500 और 1000 के पुराने नोट बंद किए जाने के बाद कश्मीर में मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है।हारून का कहना है कि मृतक मुनीर दूसरी में पढ़ता था। इस बीच नायब तहसीलदार कुलदीप राज और गोरां पुलिस पोस्ट के इंचार्ज नानक चंद ने इस मामले में मोहम्मद हारून का सोमवार को बयान दर्ज किया था।
हारून रुपये बदलवाने के लिए 3 दिन तक घुम लिया लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण रुपये बदले नही जा सके। हारून ने बताया कि 18 नवंबर को जब मुनीर की ज्यादा ही हालात खराब हो गई तो हारून और उनकी पत्नी ने बिना देरी किए उसे अस्पताल ले जाने का फैसला किया। हारून अपनी पत्नी के साथ बेटे को कंधे पर लादकर अपने घर से तीन बजे चले। इसके बाद वे नौ किलोमीटर चलने के बाद रात आठ बजे के करीब सड़क तक पहुंचे।
हारूनी ने सडक पर एक वैन ड्राइवर से प्रार्थना की कि वे हमें मानसर पहुंचा दें, लेकिन उसने पुराने नोट लेने से मना कर दिया। हारून पैदल ही बच्चे को सुबह पांच बजे डॉक्टर के पास पहुंचे, तब तक मुनीर ने दम तोड़ दिया था।